Wednesday, July 9, 2008

few poetic lines.....................








  1. रोने का तो आलम ऐसा था,हम झूम के सावन तक पहोंचे,दो चार ही आँसू ऐसे थे,जो आप के दामन तक पहोंचे...विराना हमारा क्या कम था,
किस्मत में अपनी जब ग़म था,
हर फूल मिला काँटों की तरह,
हम किसलिए गुलशन तक पहोंचे...सोचा था सुकून कुछ पाएंगे,
मालुम न था पछतायेंगे,
जुल्फों के भरोसे चलके हम,
पहोंचे भी तो उलझन तक पहोंचे...

२.



मैं वोही हों जिसे तुम दोस्त कहा करते थे
दिन मैं सो बार मेरा नाम लिखा करते थे
आज किया बात है
क्यूँ मुझ से खफा बेठे हो
किया किसी और को दोस्त बना बेठे हो
फासले इतने तो पहले न होया करते थे
मैं वोही हों जिसे तुम दोस्त कहा करते थे
तुम अगर भूल गए हो तो कोई बात नही
ज़ख्म तो पहले भी इस दिल पर लगा करते थे
मैं वोही हों जिसे तुम दोस्त कहा करते थे

















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