Wednesday, July 9, 2008

अर्ज़ है !!!!!!!!

आसू में ना धुन्दो हमे,
दिल में हम बस जायेंगे,
तमन्ना हो अगर मिलने की,
तोह बंद आंखों में नज़र आएंगे।


इज्रार-ऐ-ग़म हम किस से करें,
तुम्हारे सिवा कोई रकीब भी तो नहीं,
पर हमें इस बात का गम नहीं,
सोचेंगे की तुम्हें पाना हमारे नसीब में ही नहीं....


मुझे दिल से नकल देने वाले
मेरे मरने का धुक न करना
हम तो ख़ुद हे आँसू भा लेंगे
अपने लाश को जलता देख कर

उस फलक के तीर का क्या निशाना थाजहाँ थी मेरी मंजिल वहीँ मेरा आशियाना था बस
पहुँच ही रही थी कश्ती साहिल पिस तूफ़ान को भी अभी ही आना था...

फासले मिटा कर आपस में प्यार रखना,प्यार का यह रिश्ता हमेशा उ ही बरक़रार रखना...
बिचाद जाए कभी आप से हम,आँखों में हमेशा हमारा इंतज़ार रखना...

कभी मोहब्बत करो तो हम से करना,दिल की बात करो तो हम से करना,
न कह सको तो आँखे जुका लेना,हम ख़ुद समाज जायेंगे तुम कुछ मत कहना

आंखे तो चाहत में दिल की जुबान होती है,सची चाहत तो सदा बेजुबान होती है,प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घभाराना,सुना है दर्द से चाहत और जवान होती है.

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